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Google Doodle: जानें, कौन थे शेख दीन मोहम्मद जिनको गूगल कर रहा सलाम

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Google Doodle: जानें, कौन थे शेख दीन मोहम्मद जिनको गूगल कर रहा सलाम

यूरोप को भारतीय व्यंजन का स्वाद चखाने और शैंपू से परिचय कराने वाले इंसान का नाम है शेख दीन मोहम्मद।

शेख दीन मोहम्मद एक नाम है जो 19वीं सदी के इंग्लैंड के लिए किसी सिलेब्रिटी से कम नहीं था। भारत में जन्मे शेख दीन मोहम्मद ने अंग्रेजों के मुताबिक अपना नाम को बनाने के लिए अपने नाम के शेख को सेक कर लिया। यानी वह इंग्लैंड में सेक दीन महोमद कहलाए। शेख दीन मोहम्मद एक सर्जन के साथ-साथ लेखक भी थे। उन्होंने यूरोप के लोगों को भारतीय खान-पान से अवगत कराया और शैंपू बाथ से भी परिचय कराया। वह पहले शख्स थे जिन्होंने इंग्लिश में पहली किताब प्रकाशित की थी। उन्होंने लंदन में पहला भारतीय रेस्ट्रॉन्ट भी खोला था जो वित्तीय संकट का शिकार हो गया। आज उसी शेख मोहम्मद दीन को गूगल ने अपना डूडल समर्पित किया है। आइए आज उनके बारे में हम कुछ खास बातें जानते हैं…

पटना से लंदन का सफर
शेख दीन मोहम्मद का जन्म साल 1759 में पटना, बिहार में हुआ था। उस समय बिहार बंगाल प्रेजिडेंसी का हिस्सा हुआ करता था। उनका परिवार बक्सर का रहने वाला था। उनके पिता नाई जाति के थे और ईस्ट इंडिया कंपनी में सेवारत थे। शेख के पिता कीमियागिरी यानी रसायन बनाने की विद्या के माहिर थे यानी उनको विरासत में यह चीज मिली थी। शेख के पिता ने मुगलों के दौर में इस्तेमाल होने वाली बहुत सी कीमियागिरी सीखी थी और अल्काली, साबुन एवं शैपू बनाने की तकनीक जानते थे।

शेख दीन मोहम्मद की परवरिश पटना में हुई। जब वह 10 साल के थे तो पिता की मौत हो गई। पिता की मौत के बाद आयरिश मूल के एक भारतीय ऑफिसर ने उनके सिर पर हाथ रखा। उस ऑफिसर का नाम कैप्टन गॉडफ्रे इवान बेकर था। इवान बेकर प्रोटेस्टेंट ईसाई थे। उन्होंने दीन मोहम्मद को बेकर ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की अपनी यूनिट में बतौर ट्रेनी सर्जन रख लिया। मराठाओं से जब अंग्रेजों का युद्ध हुआ उस समय भी उन्होंने कंपनी में अपनी सेवा दी। बेकर की मेहरबानी और उनकी यूनिट में होने के वजह से बेकर और मोहम्मद के बीच गहरी दोस्ती हो गई। 1782 में जब बेकर ने इस्तीफा दिया तो मोहम्मद ने भी आर्मी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वह बेकर के साथ आयरलैंड चले गए।

(फोटो: साभार ट्विटर)

स्कूल में हुआ प्यार, शादी के लिए धर्म बदला
1784 में दीन मोहम्मद बेकर फैमिली के साथ आयरलैंड के कॉर्क शहर पहुंचे। बेकर दीन मोहम्मद के साथ बेटे जैसा सलूक कर रहे थे। बेकर ने उनका दाखिला एक स्कूल में करा दिया जहां वह इंग्लिश और साहित्य की पढ़ाई करने लगे। स्कूल में पढ़ने के दौरान जेन डेली से उनको प्यार हो गया। लेकिन डेली का परिवार उनके संबंध के खिलाफ था। इस वजह से दोनों दूसरे शहर भाग गए और 1786 में शादी कर ली। उस समय प्रोटेस्टेंट ईसाई का गैर प्रोटेस्टेंट ईसाई से शादी करना अवैध था। इसके बाद मोहम्मद धर्म परिवर्तन करके प्रोटेस्टेंट्स ईसाई बन गए। दोनों बाद में इंग्लैंड के ब्राइटन शहर पहुंच गए।

मोहम्मद को पांच बच्चे हुए जिनके नाम रोजाना, हेनरी, होराशिया, फ्रेडरिक और आर्थर थे। उनका एक पोता अंतरराष्ट्रीय स्तर का चिकित्सक बना था जिसका नाम फ्रेडरिक हेनरी होराशियो अकबर मोहम्मद था। वह लंदन के गायज हॉस्पिटल में काम करता था और हाई ब्लड प्रेशर की स्टडी में काफी योगदान दिया।

एक किताब और इंग्लैंड में मशहूर हो गए मोहम्मद
इंग्लैंड में लोगों के बीच मोहम्मद की ख्याति एक किताब से बढ़ी। उस किताब का नाम था The Travels of Dean Mahomed जिसे मोहम्मद ने खुद लिखा था। यह उनकी आत्मकथा थी। 15 जनवरी, 1794 को उस किताब के प्रकाशित होने के साथ ही वह पहले भारतीय बन गए जिनकी इंग्लिश में किताब छपी। वैसे तो ब्रिटिश काफी समय से भारत में थे लेकिन उनको मोहम्मद की आत्मकथा से भारत को और करीब से समझने का मौका मिला। किसी भी स्थान को समझने के लिए वहां के स्थानीय द्वारा लिखे गए साहित्य ज्यादा उपयुक्त माने जाते हैं। इसलिए अंग्रेजों को मोहम्मद का साहित्य काफी जंचा। किताब में चंगेज खां, तैमूर और पहले मुगल शासक बाबर के बारे में लिखा गया है। भारत के अलग-अलग शहरों के बारे में भी किताब में विस्तार से उल्लेख किया गया है। किताब में भारतीय रियासतों से ब्रिटिश के सैन्य संघर्षों का भी उल्लेख किया गया है।

इंग्लैंड में पहला भारतीय रेस्ट्रॉन्ट
1810 में मोहम्मद आयरलैंड से लंदन आ गए। वहां सेंट्रल लंदन के पोर्टमैन स्क्वेयर के पास उन्होंने जॉर्ज स्ट्रीट में हिंदुस्तानी कॉफी हाउस के नाम से एक रेस्ट्रॉन्ट खोला। वह रेस्ट्रॉन्ट इंग्लैंड में पहला भारतीय रेस्ट्रॉन्ट था। उस रेस्ट्रॉन्ट में कढ़ी और चिलम तंबाकू वाला हुक्का और अन्य भारतीय व्यंजन मिलते थे। मोहम्मद को भारत से ब्रिटेन वापस आए अंग्रेजों से काफी उम्मीद थी। उन्होंने सोचा था कि वे अंग्रेज उनके रेस्ट्रॉन्ट में बड़ी संख्या में आएंगे और भारतीय व्यंजन का स्वाद चखेंगे। लेकिन मोहम्मद का अंदाजा गलत निकला। शहर के पूर्वी किनारे पर पहले से स्थापित हो चुके रेस्ट्रॉन्ट और स्थानीय धनाढ्य लोगों के भारतीय नौकरों की वजह से मुकाबला कड़ा हो गया। इससे मोहम्मद दिवालियापन की कगार पर पहुंच गए और अंत में रेस्ट्रॉन्ट को बंद करना पड़ा।

(बाथिंग मशीन: साभार ट्विटर)

यूरोप में शैंपू
रेस्ट्रॉन्ट बिजनस में नाकाम होने के बाद शेख मोहम्मद दीन अपनी पत्नी के साथ इंग्लैंड के ब्राइटन शहर में बस गए। वहां उन्होंने मेडिकल अनुभव का फायदा उठाया और पहला बाथ स्पा खोला। उनके बाथ स्पा का नाम था Mahomed’s Baths। बाथ स्पा में वह ग्राहकों को स्टीम बाथ देते थे और चंपी यानी सिर की मालिश करते थे। उन्होंने चंपी को वहां शैंपूइंग नाम दिया। उन्होंने एक स्थानीय अखबार में इसका विज्ञापन दिया और दावा किया कि कई बीमारियों से छुटकारा पाने में स्टीम बाथ काफी फायदेमंद है। दीन मोहम्मद का यह बिजनस चल निकला और वह डॉक्टर ब्राइटन के नाम से मशहूर हो गए। यहां तक कि अस्पतालों से भी मरीजों को दीन मोहम्मद के पास रेफर किया जाने लगा। उनके चर्चे सुनकर जॉर्ज चौथे ने उनको अपना शैंपुइंग सर्जन नियुक्त किया और विलियम चौथे तक वे अपनी सेवा देते रहे।

(फोटो: साभार ट्विटर)
निधन
ब्राइटन में साल 1851 में उनका निधन हो गया। उनको सेंट निकोलस चर्च, ब्राइटन में एक कब्र में दफनाया गया।

भुला दिए गए थे मोहम्मद
विक्टोरिया युग में शेख दीन मोहम्मद की लोकप्रियता कम होने लगी। उनको इतिहास ने करीब-करीब भुला दिया। उनको प्रकाश में लाने का श्रेय कवि और विद्वान आलमगीर हाशमी को जाता है। उन्होंने 80 के दशक में इस लेखक की ओर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। उसके बाद माइकल एच.फिशर ने उन पर एक किताब लिखी। किताब का नाम The First Indian Author in English: Dean Mahomet in India, Ireland and England था। साल 1996 में यह किताब ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, दिल्ली से प्रकाशित हुई।

29 सितंबर, 2005 को वेस्टमिंस्टर शहर में एक हरे प्लेक यानी शिलापट्ट का हिुंस्तानी कॉफी हाउस खुलने की याद में लोकार्पण हुआ। 34 जॉर्ज स्ट्रीट में जहां कॉफी हाउस था, उसी स्थान के करीब 102 जॉर्ज स्ट्रीट में प्लेक का अनावरण किया गया था।

काम
शेख मोहम्मद दीन दो किताबें लिखीं। एक यात्रा से संबंधित थे The Travels of Dean Mahomed और दूसरी पुस्तक Shampooing or Benefits Resulting from the use of Indian Medical Vapour Bath में चंपी के फायदे बताए गए थे।

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