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Army Day 2019: पाकिस्तान का राष्ट्रपति करता था इस महान भारतीय ‘सैनिक’ को सलाम

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Army Day 2019: पाकिस्तान का राष्ट्रपति करता था इस महान भारतीय ‘सैनिक’ को सलाम

15 जनवरी 1949 को के. एम. करिअप्पा बने थे भारतीय सेना के पहले प्रमुख

Army Day 2019: पाकिस्तान का राष्ट्रपति करता था इस महान भारतीय 'सैनिक' को सलाम

Army Day 2019: पाकिस्तान का राष्ट्रपति करता था इस महान भारतीय सैनिक को सलाम!

15 जनवरी हिंदुस्तान के इतिहास में बेहद ही अहम दिन माना जाता है. ये वो दिन है जब भारतीय सेना पूरी तरह आजाद हुई और सेना की कमान पहली बार एक भारतीय को सौंपी गई. 70 साल पहले आज ही के दिन कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा (केएम करिअप्पा) को भारत का पहला सेना प्रमुख बनाया गया था. 28 जनवरी 1899 को कर्नाटक के कुर्ग में जन्मे करिअप्पा फील्ड मार्शल के पद पर पहुंचने वाले इकलौते भारतीय हैं. फील्ड मार्शल सैम मानेकशा दूसरे ऐसे अधिकारी थे, जिन्हें फील्ड मार्शल का रैंक दिया गया था. करिअप्पा ने 1947 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में अदम्य साहस और दमदार नेतृत्व का परिचय दिया था. पाकिस्तान के युद्ध के समय उन्हें पश्चिमी कमान का जी-ओ-सी-इन-सी बनाया गया था. उनके नेतृत्व में भारत ने जोजीला, द्रास और करगिल पर पाकिस्तानी सेना को हराया था.

फील्ड मार्शल कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा

फील्ड मार्शल करिअप्पा ने अपनी सर्विस के दौरान कई कारनामे किए लेकिन भारतीय सेना से साल 1953 में रिटायर होने के बाद उनके जीवन में एक ऐसी घटना घटी जिसे जानकर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा. दरअसल 1965 के भारत-पाक युद्ध के वक्त करिअप्पा रिटायर होकर कर्नाटक में रह रहे थे. करिअप्पा का बेटा केसी नंदा करिअप्पा उस वक्त भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट था. युद्ध के दौरान उसका विमान पाकिस्तान सीमा में प्रवेश कर गया, जिसे पाक सैनिकों ने गिरा दिया. करिअप्पा के बेटे ने विमान से कूदकर जान तो बचा ली, लेकिन वो पाक सैनिकों के हत्थे चढ़ गए.

कोडंडेरा मडप्पा करिअप्पा


1965 युद्ध के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान थे, जो कभी करिअप्पा के जूनियर थे और भारतीय सेना में नौकरी कर चुके थे. उन्हें जैसे ही करिअप्पा के बेटे नंदा के पकड़े जाने का पता चला उन्होंने तुरंत उन्हें फोन किया और बताया कि वो उनके बेटे को रिहा कर रहे हैं. इस पर करिअप्पा ने बेटे का मोह त्याग कर कहा कि वो सिर्फ मेरा बेटा नहीं, भारत मां का लाल है. उसे रिहा करना तो दूर कोई सुविधा भी मत देना. उसके साथ आम युद्धबंदियों जैसा बर्ताव किया जाए. करिअप्पा ने अयूब खान से कहा कि या तो आप सभी युद्धबंदियों को रिहा करें या फिर किसी को नहीं. हालांकि युद्ध खत्म होने के बाद सभी युद्धबंदियों को रिहा कर दिया गया.

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